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विश्लेषकों ने उन प्रमुख कारकों की पहचान की है, जो सोने की कीमतों में संभावित बड़ी तेजी ला सकते हैं।

विश्लेषकों ने उन प्रमुख कारकों की पहचान की है, जो सोने की कीमतों में संभावित बड़ी तेजी ला सकते हैं।

अमेरिकी वित्तीय दिग्गज वेल्स फ़ार्गो के विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक सोने की कीमतें 2027 के अंत तक 5,800–6,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस तक पहुँच सकती हैं। उनके आकलन के अनुसार, सोने में निवेश का जोखिम-प्रतिफल (Risk-Return) अनुपात काफी बेहतर हो गया है, जिससे यह निवेशकों के लिए पहले से भी अधिक आकर्षक बन गया है। निकट भविष्य में भी सोने में लगातार तेजी रहने की उम्मीद है, और बैंक का अनुमान है कि इस वर्ष के अंत तक सोना 5,300–5,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुँच सकता है।

सोने की कीमतों में इस संभावित बढ़ोतरी के प्रमुख कारणों में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की मजबूत खरीद, प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सरकारी कर्ज का तेज़ी से बढ़ना, लगातार बने हुए महंगाई (Inflation) के जोखिम, और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता शामिल हैं। ऐसे माहौल में निवेशक सोने को अपनी प्रमुख सुरक्षित निवेश (Safe-Haven) संपत्ति के रूप में इस्तेमाल करना जारी रख सकते हैं। ऐतिहासिक रूप से भी सोने ने असाधारण वृद्धि दिखाई है। पिछली सदी के अंत से लेकर 2025 तक इसकी कीमत लगभग 12 गुना बढ़ चुकी है, जो अन्य सभी प्रमुख धातुओं से कहीं अधिक है।

इसी बीच, रूस के केंद्रीय बैंक (बैंक ऑफ रूस) ने अपने सोने के भंडार में उल्लेखनीय कमी की है। 1 जुलाई 2026 तक बैंक के पास 7.34 करोड़ ट्रॉय औंस (लगभग 2,283 टन) सोना बचा है, जो फ़रवरी 2020 के बाद का सबसे निचला स्तर है। वर्ष की शुरुआत से अब तक रूसी केंद्रीय बैंक 43.5 टन सोना बेच चुका है, जो 2002 के बाद उसकी सबसे बड़ी सोने की बिक्री मानी जा रही है।

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