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विश्व बैंक: अमेरिका–ईरान संघर्ष बढ़ने पर वैश्विक आर्थिक वृद्धि घटकर 1.3% रह सकती है।

विश्व बैंक: अमेरिका–ईरान संघर्ष बढ़ने पर वैश्विक आर्थिक वृद्धि घटकर 1.3% रह सकती है।

विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री इंदरमीत गिल ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष और बढ़ता है, तो वैश्विक महंगाई फिर से बढ़कर 4.5% तक पहुँच सकती है, ब्याज दरों में वृद्धि हो सकती है और वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर पिछले वर्ष के 2.9% से घटकर केवल 1.3% रह सकती है। उनके अनुसार, विश्व बैंक का सबसे खराब स्थिति वाला परिदृश्य, जिसमें कम से कम छह महीने तक लगातार सैन्य संघर्ष जारी रहता है, अब धीरे-धीरे वास्तविकता का रूप लेने लगा है।

मध्य पूर्व की स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में कई ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमले किए। इसके अलावा, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में समुद्री व्यापार में व्यवधान और हूती विद्रोहियों द्वारा बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से सऊदी अरब की खेपों पर घोषित नाकेबंदी से वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर खतरा पैदा हो गया है, क्योंकि इससे उर्वरक, सल्फर और हीलियम जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

इस संकट का सबसे अधिक असर गरीब और भारी कर्ज़ में डूबे देशों पर पड़ेगा, जबकि अमेरिका, चीन और भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ अपेक्षाकृत कम प्रभावित होंगी। 2025 में विकासशील देशों का औसत ऋण-से-जीडीपी (Debt-to-GDP) अनुपात बढ़कर 74% हो गया, जबकि महामारी से पहले यह लगभग 50–55% था। वर्तमान में निम्न और मध्यम आय वाले लगभग 40% देश पहले ही ऋण संकट का सामना कर रहे हैं। यदि ब्याज दरें और बढ़ती हैं, तो इन देशों को स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सरकारी खर्च कम करना पड़ सकता है।

इंदरमीत गिल ने इस उभरते हुए संकट को "धीमी गति से होने वाली रेल दुर्घटना" (Slow-motion train wreck) की संज्ञा दी। उनके अनुसार, वित्तीय तनाव के संकेत पहले ही दिखाई देने लगे हैं। पाकिस्तान ने अमेरिका से 10 अरब डॉलर की मुद्रा स्थिरीकरण (Currency Stabilization) सुविधा की मांग की है, जबकि कई अन्य देशों ने भी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से अपने ऋण की सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया है।

हालाँकि, विकासशील देशों के लिए एक सकारात्मक पहलू कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence - AI) है। अनुमान है कि इन देशों में स्वचालन (Automation) का प्रभाव केवल लगभग 10% श्रमिकों पर पड़ेगा, जबकि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में यह प्रभाव 30–40% तक हो सकता है। हालांकि, एआई से मिलने वाले वास्तविक और व्यापक आर्थिक लाभ इस दशक के बाद ही स्पष्ट रूप से सामने आने की संभावना है।

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